गुरुवार, 19 जनवरी 2012

"माँ "


"करू वंदना ,करू नमन ।

"माँ " 

क्या ?पुजती रहती हो ?

गंगा से भी पवित्र हो तुम ।

क्या ?मन ही मन गुनती  हो ।

हो सप्ततीर्थो से भीं तीर्थ तुम ,

निश्चल प्रेम बन ह्रदय में बहती हो ।

हो अतुलनीय तुम ,तुलना किससे ?

सूर्य -चन्द्रमा सी दमकती हो ।

हाथ जोड़ कर खड़े खुद दिवाकर ।

किसकी प्रार्थना करती हो "

है विशाल आँचल में पुण्य छिपा ।

"माँ "

तुम संसार बन जग में खिलती हो ।


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